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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

म हिंदी वर्णमाला का पचीसवाँ व्यंजन और प वर्ग का अंतिम वर्ण । इसका उच्चारण स्थान होंठ और नासिका है । जिह्वा के अगले भाग का दोनों होठों से स्पर्श होने पर इसका उच्चारण होता है । यह स्पर्श और अनुनासिक वर्ण हे । इसके उच्चारण में संवार, नादघोष और अल्पप्राण प्रयत्न लगते हैं । प, फ, ब और भ इसके सवर्ण हैं ।

म ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. शिव ।

२. चंद्रमा ।

३. ब्रह्मा ।

४. यम । ५ समय ।

६. विष । जहर ।

७. मधुसूदन ।

८. छंदःशास्त्र में एक गण । मगण ।

९. संगीत में एक स्वर । मध्यम ।

१०. जल । पानी (को॰) । सौभाग्य । प्रसन्नता (को॰) ।

म पु ^२ अव्य॰ [हिं॰ महँ] दे॰ 'में' । उ॰—ठाढ़ि जो हौं बाट म, साहेब चलि आवो ।—धरम॰ श॰, पृ॰ २३ ।

म ^३ अव्य॰ [सं॰ मा] न । नहीं । उ॰—कवि भ्रम भमर म सोचकर, सिमरि नाम अभिराम ।—रा॰ रू, पृ॰ १ ।

म संज्ञा पुं॰ [सं॰] क्षांति ।