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हिन्दी

समुच्चयबोधक

  1. और, तथा

अक्षर

  1. २९वाँ देवनागरी व्यंजन

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

व हिंदी या संस्कृत वर्णमाला का उन्नीसवाँ व्यंजन वर्ण, जो उकार का विकार और अंतस्थ अर्धव्यंजन माना जाता है । इसका उच्चारणस्थान दंत्योष्ठ है, अर्थात् दाँत और से इसका उच्चारण होता है । प्रयत्न ईषत्स्पृष्ट होता है, अर्थात् उच्चारण के समय दाँतों का ओठ से कुछ स्पर्श होता है । हिंदी में इस वर्ण का उच्चाऱण अधिकतर केवल ओठ से होता है; केवल संस्कृताम्यासी लोग ही शुद्ध दंत्योष्ठ उच्चारण करते हैं ।

व ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. वायु ।

२. बाण ।

३. वरुण ।

४. बाहु ।

५. मंत्रणा ।

६. कल्याण ।

७. सांत्वना ।

८. वसति । बस्ती ।

९. वरुणालय । समुद्र ।

१०. शार्दूल ।

११. वस्त्र ।

१२. कोई का कंद । सेरकी ।

१३. जल में उत्पन्न होनेवाले कंद । शालूक ।

१४. वंदन ।

१५. अस्त्र ।

१६. खङ्गधारी पुरुष ।

१७. मूर्वा नामक लता ।

१८. वृक्ष ।

१९. कलश से उत्पन्न ध्वनि ।

२०. मद्य ।

२१. प्रचेता ।

२२. । पानी । जल (को॰) ।

२३. आदर । संमान (को॰) ।

२४. राहु (को॰) ।

व ^२ वि॰ बलवान् ।

व ^३ अव्य॰ [फ़ा॰] और । जैसे,—राजा व रईस ।