सामग्री पर जाएँ

विक्षनरी से
अं
क्ष त्र ज्ञ लृ श्र अः
सार्वभौमिक वर्ण समुच्चय
यूनिकोड नामदेवनागरी अक्षर
देवनागरीU+0905

शीर्षक

उच्चारण

(file)

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

फ हिंदी वर्णामाला में बाईसवाँ व्यंजन और पवर्ग का दूसरा वर्ण । इसके उच्चारण का स्थान ओष्ठ है और इसके उच्चारण में आभ्यंतर प्रयत्न होता है । इसे उच्चारण करने मे जीभ का अगला भाग होठों से लगता है । इसलिये इसे स्पर्श वर्ण कहते हैं । इसके बाह्य प्रयत्न, सवार, श्वास और अधोष हैं । इसकी गिनती गहाप्राण में होती है । प, व, भ और म इसके सवर्ण है ।

फ ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. कटु वाक्य । रूखा वचन ।

२. फुक्कार । फुक्कार ।

३. निष्फल भाषण ।

४. यक्षसाधन ।

५. अंधड़ ।

६. जम्हाई ।

७. स्फुट ।

८. फललाभ ।

९. वृद्धि । विस्तार । वर्धन (को॰) ।

फ ^२ वि॰ सुस्पष्ट । प्रकट । व्यक्ति । प्रत्यक्ष [को॰] ।