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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ग व्यंजन के ? में कवर्ग का तीसरा वर्ण । इसका उच्चारणस्थान कंठ है और शिक्षा में यह 'क' का गंभीर संस्पृष्ट रूप माना गया है । इसका प्रयत्न अघोष अल्पप्राण है ।

ग ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. गीत ।

२. गंधर्व ।

३. गुरुमात्रा ।

२. गणेश ।

ग ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. गानेवाला । जैसे,—सामग ।

२. जानेवाला । पहुँचानेवाला । जैसे,—अध्वग, कठग । विशेष—इस अर्थ में यह समस्त शब्दों के अंत में आता है ।